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सूर्य मिशन की सफलता भारत की सामर्थ्य की गाथा है!

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नए साल के पहले ही सप्ताह में भारत को वैश्विक पटल पर परचम लहराने वाले एक खबर ने सबको गौरवान्वित किया। 6 जनवरी की शाम को इसरो ने सूर्य मिशन के तहत आदित्य को एल1 (लैंग्रेज पॉइंट) के पास की अंडाकार कक्षा (होलो आॅर्बिट) में स्थापित कर दिया। इसके साथ ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और सफलता के स्वर्णिम अध्याय अपने खाते में जोड़ लिया।

सूर्य की कुंडली खंगालने के लिए 126 दिनों में 15 लाख किमी का सफर तय करके आदित्य अपने गंतव्य एल1 पर पहुंचा, जहाँ इसे अंडाकार होलो आॅर्बिट में स्थापित कर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो वैज्ञानिकों को भारत का नाम विश्व पटल पर एक बार फिर से ऊंचा करने पर बधाई दी। आदित्य के सफलतापूर्वक होलो आॅर्बिट में स्थापित होने पर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने इसरो की सराहना करते हुए इसे उल्लेखनीय अंतरिक्ष यात्रा करार दिया है।

नासा ने कहा है कि इसरो ने पिछले 20 वर्षों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। आदित्य एल1 के सफलता के बाद कहा जा सकता है कि यह बेहद रोमांचक और स्वर्णिम सफर माना जा रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों का दावा है कि आदित्य एल1 न केवल भारत के लिए उपयोगी सिद्ध होने वाला है बल्कि यह विश्व के लिए भी सूर्य को समझने के लिए महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।

भारत ने पिछले साल वैश्विक पटल के हर मोर्चे पर न केवल अपने सामर्थ्य का परिचय दिया था बल्कि अपना लोहा भी मनवाया। एक तरफ इसरो के वैज्ञानिकों ने भारत का झंडा चांद से सूरज तक बुलंद किया। 14 जुलाई 2023 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चंद्रयान-3 को चाँद के दक्षिणी पोल पर पहुंचने वाला पहला देश होने का गौरव हासिल किया। भारत यूएस-इण्डिया आईसीइटी लॉन्च करने के साथ भारत ने क्वांटम समन्वय तंत्र, दूरसंचार, एआई के साथ सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला पर भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की।

जून 2023 में अंतरिक्ष में भारत के उद्यम ने आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर के साथ ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया। इसके बाद भारत वैश्विक अंतरिक्ष में शामिल होने वाला 27वां देश बन गया। दरअसल भारत ने न केवल अंतरिक्ष बल्कि सामुद्रिक क्षेत्रों में भी सफलता का परचम लहराया है। देश के पहली घरेलू स्तर पर निर्मित विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत के जलावतरण के साथ अपनी नौसेनिक क्षमताओं को भी ऊँचाइयों पर पहुंचाया।

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित 45000 टन वजनी आईएनएस विक्रांत ने आत्म निर्भर भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व किया। देश के भीतर डिजाइन और निर्मित किया गया सबसे बड़ा नौसैनिक जहाज से भारत अपने नौसेना प्रौद्योगिकी में शक्ति का लोहा मनवाया। इतना ही नहीं, साल के अंत में आईएनएस इम्फाल युद्धपोत को भारतीय नैसेना में शामिल करना हिन्द महासागर में चीन की बढ़ती घुसपैठ को रोकने और अरब सागर को सुरक्षित करने के लिहाज से क्षमताओं को सुदृढ़ करने के दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। 75 प्रतिशत स्वदेशी यह सामुद्रिक सुरक्षा के दृष्टि से कई तरह के वर्तमान तकनीकियों से लैस है।

कृषि क्षेत्र के साथ सेंसेक्स में सफलता की बात करें तो मोटे अनाज को वैश्विक पहचान मिली। भारत के प्रस्ताव के बाद संयुक्त राष्ट्र ने साल 2023 को इंटरनेशनल ईयर आॅफ मिलेट्स घोषित किया। भारत इन अनाजों का सबसे बड़ा निर्यातक है। इसी साल शेयर बाजार पहली बार चार ट्रिलियन डॉलर के बाजार मूल्य को पार कर गया, जो दुनिया के पांचवें सबसे बड़े इक्विटी बाजार के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धियों वाला रहा। इसके साथ सेंसेक्स ने नया रिकार्ड बनाते हुए पहली बार 71 हजार का आंकड़ा पार किया। फिर भी भारत का उत्साह बता रहा है कि भारत वैश्विक पटल पर अपना झंडा बुलंद रखने वाला है।
(यह लेखक के निजी विचार हैं।)

-शगुन चतुर्वेदी

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