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हरियाणा में नशा तस्करी रोकने के लिए उठाना होगा कठोर कदम
संजय मग्गू
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बिलकुल सही बात कही है कि नशा तस्करी अब केवल पंजाब की ही समस्या नहीं रही, बल्कि यह हरियाणा और हिमाचल तक फैल चुकी है। यदि इसी बात को राष्ट्रीय आधार पर कहें, देश के लगभग हर क्षेत्र में नशीले पदार्थों की अबाध बिक्री हो रही है। देश का कोई जिला शायद ही नशा मुक्त हो। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में यह समस्या कुछ ज्यादा ही जटिल होती जा रही है। हरियाणा में भी पिछले कुछ वर्षों से नशीले पदार्थों का सेवन बढ़ता जा रहा है। दूध-दही की प्रचुरता वाले प्रदेश में अब शराब, चूरा पोस्त, अफीम, गांजा, भांग, ड्रग्स और न जाने कैसे-कैसे नशीले पदार्थ बिकने लगे हैं। हरियाणा के शहर ही नहीं, गांव और ढाणियां तक नशा तस्करों की पहुंच होने लगी है। पिछले साल 2024 में सरकार ने खुद इस बात को स्वीकार किया था कि प्रदेश के 22 जिलों में से 16 जिले गंभीर नशे की चपेट में हैं। इन जिलों में ड्रग्स की रोकथाम के लिए किए जाने वाले तमाम  प्रयास प्रभावहीन ही रहे। बाकी जिलों में भी नशीले पदार्थों के बिकने की सूचनाएं सरकार के पास हैं और वह इन्हें नशे के गर्त में जाने से रोकने का हर संभव प्रयास कर रही है। प्रदेश के खुफिया विभाग की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश के गांवों में तेजी से नशा बढ़ रहा है। नाबालिग, किशोर से लेकर बूढ़े आदमी तक नशे का सेवन कर रहे हैं। प्रदेश के नौ सौ से ज्यादा गांवों में नशा तस्करों की आसान पहुंच हो रही है। यह गांव नशे से बुरी तरह प्रभावित हैं। नशे की गंभीर चपेट में आने वाले सभी जिलों के 20 से 50 गांव शामिल हैं। वैसे एक अनुमान के अनुसार, प्रदेश के लगभग तीन हजार गांवों तक ड्रग्स पहुंच रही हैं। प्रदेश में 2024 के नवंबर महीने तक नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत कुल 2873 केस दर्ज किए जा चुके थे और 4371 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था। इन आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन औसतन सात और हर महीने 239 मामले सामने आ रहे थे, जबकि हर रोज 11 और हर महीने 364 नशा तस्कर काबू किए जा रहे थे। इनके अलावा ऐसे भी बहुत से मामले हैं, जो दर्ज ही नहीं किए गए थे या रिपोर्ट ही नहीं हुए थे। प्रदेश के ज्यादातर मेडिकल स्टोर्स पर बिना पर्ची के प्रतिबंधित दवाएं बिक रही हैं जिनका उपयोग नशे के लिए किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार को सख्त हिदायत दी है कि वह यह हर हालत में सुनिश्चित करे कि कोई भी ऐसी दवाएं जो कानूनन बिना प्रिस्क्रिप्शन नहीं दिया जा सकता है, खुदरा विक्रेताओं और केमिस्टों द्वारा कतई न बेची जाएं। प्रदेश के युवाओं को नशे की लत से बचाना है, तो सरकार को कठोर कदम उठाना ही पड़ेगा।

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