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टिकट बंटवारे के बाद पस्त दिख रहा हुड्डा विरोधी खेमा

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नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख बीत जाने के बाद जैसे सब कुछ थम सा गया है हरियाणा की राजनीति में। 12 सितंबर से पहले की टिकटों को लेकर जो गहमागहमी थी, वह खत्म हो गई है। अभी तक भाजपा, कांग्रेस में जो भी नेता अपने या अपने समर्थकों को टिकट दिलाने के लिए मुखर थे, सक्रिय थे, उनकी सारी सक्रियता थम सी गई है। वैसे नामांकन के बाद भी छिटपुट रैलियां, जनसभाएं या गोष्ठियां आज भी जारी है, लेकिन ऐसा लगता है कि अगली रणनीति पर काम करने, अपने या अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए नई ऊर्जा और जोश हासिल करने के लिए सभी दलों के नेता आज कुछ सुस्ताने के मूड में हैं। वैसे भाजपा के नेता और मंत्री कल यानी 14 सितंबर को कुरुक्षेत्र के थीम पार्क में होने वाली पीएम नरेंद्र मोदी की रैली को सफल बनाने में लगे हुए हैं।

लेकिन कांग्रेस, जजपा, इनेलो, बसपा जैसे दलों में आज कुछ सुस्ती दिखाई दे रही है। यह सुस्ती शायद आज भर की है। शायद कल से फिर सभी राजनीतिक दल एक नई ऊर्जा और जोश के साथ चुनावी महासमर में उतर जाएंगे। फिर शुरू होगा, मतदाताओं को लुभाने का दौर, एक दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप लगाने का युग। कांग्रेस में नामांकन की तारीख बीत जाने के बाद राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा काफी तेज रही है कि इस बार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने समर्थकों को टिकट दिलाने में काफी हद तक सफलता प्राप्त कर ली है। सियासी गलियारे में तो चर्चा है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 89 उम्मीदवारों में से 72 उम्मीदवार हुड्डा खेमे के हैं। कांग्रेस हाई कमान ने भी हुड्डा को ही प्रदेश कांग्रेस का सर्वमान्य नेता माना है। यही सब देखकर शायद कुमारी सैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला वाला गुट नरम पड़ता दिखाई दे रहा है।

नामांकन खत्म होने से पहले बगावती तेवर दिखाने वाली कुमारी सैलजा ने तो अब यह कहना शुरू कर दिया है कि सभी लोग अपने-अपने समर्थक को टिकट दिलाने का प्रयास करते हैं, लेकिन जब किसी का टिकट हाईकमान तय कर देता है, तो वह पूरी पार्टी का उम्मीदवार बन जाता है। तब पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए वह अपना-पराया नहीं रह जाता है और कार्यकर्ता उसे जिताने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। हर आदमी को अपनी इच्छा व्यक्त करने का अधिकार है। लेकिन उस पर फैसला लेना हाई कमान का काम है। जिस तरह कांग्रेस में हुड्डा विरोधी गुट नरम पड़ता दिखाई दे रहा है, उससे लगता है कि उसने अब हथियार डाल दिए हैं या फिर उन्हें हाईकमान से सख्त निर्देश दिया गया है कि मतदान होने तक उनका आपसी मतभेद लोगों के सामने नहीं आना चाहिए। जिस तरह प्रदेश में माहौल बना हुआ है, यदि कांग्रेस ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा, तो फैसला उसके पक्ष में भी हो सकता है।

-संजय मग्गू

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