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HomeEDITORIAL News in Hindiजिसकी अपनी भाषा नहीं, वह सभ्य नहीं

जिसकी अपनी भाषा नहीं, वह सभ्य नहीं

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बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
डॉ. रघुबीर सिंह का जन्म वैसे तो मध्य प्रदेश के रजवाड़े में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपना पूरा जीवन एक सामान्य नागरिक के रूप में गुजारा। वह हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार और लेखक थे। डॉ. रघुबीर सिंह का जन्म मध्य प्रदेश की सीतामऊ रियासत के महाराज सर राम सिंह के बड़े बेटे के रूप में 23 फरवरी 1908 को हुआ था। वह कुशल चित्रकार, वास्तुशास्त्री, प्रशासक, सैन्य अधिकारी, प्रबुद्ध सांसद, समर्थ इतिहासकार और सुयोग्य हिन्दी साहित्यकार थे। आजादी के बाद वह कांग्रेस के राज्यसभा सांसद भी रहे। डॉ. रघुबीर के पिता राम सिंह अपने जीवनकाल में प्रजा के हितैषी रहे। इसके चलते उन्होंने अपने बेटे रघुबीर सिंह को किसी भी राजकीय परंपरा में बंधने नहीं दिया। रघुबीर सिंह पढ़ने-लिखने वाली रुचि के थे। वह अक्सर फ्रांस की यात्रा पर जाया करते थे। फ्रांस में भी वह राजकीय परिवार में ठहरते थे। एक बार उनके लिए सीतामऊ से पत्र आया। उस घर की एक छोटी लड़की ने उस पत्र को देखा, तो रघुबीर सिंह से उस पत्र को देखने की इच्छा प्रकट की। वह छोटी लड़की रघुबीर सिंह से मुंहलगी हो गई थी क्योंकि वह उनकी जरूरतों का ख्याल रखती थी। नौकर-नौकरानियों के जरिये वही रघुबीर सिंह की जरूरतों को पूरा करती थी। रघुबीर सिंह ने वह पत्र उस बच्ची को दिखा दिया। पत्र अंग्रेजी में लिखा हुआ था। उस लड़की ने कहा, क्या तुम्हारी अपनी कोई भाषा नहीं है? यह बात उसने अपनी मां को भी बता दी, तो दूसरे दिन उसकी मां ने रघुबीर सिंह से कहा कि आप अपने रहने की  व्यवस्था दूसरी जगह कर लें क्योंकि जिसकी अपनी भाषा नहीं होती, उसे हम सभ्य नहीं समझते। यह बात रघुबीर सिंह को चुभ गई। फ्रांस से लौटकर उन्होंने हिंदी में कई पुस्तकें लिखीं।

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