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पुस्तक मोक्षमार्ग ने टोडरमल को कर दिया अमर

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बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
प्राचीनकाल के जैन साधु-संतों में राजस्थान के प्रसिद्ध संत पंडित टोडरमल का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। पंडित टोडरमल का जन्म 1719-20 के बीच माना जाता है। इनका जन्म जयपुर में हुआ था। इनका जीवनकाल कुल 47 साल ही रहा। इस बीच उन्होंने छोटी-बड़ी कुल बारह पुस्तकें लिखीं। कहा जाता है कि जयपुर में एक मूर्ति हटाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। उस समय के शासक के आदेश पर उन्हें फांसी दे दी गई थी। दरअसल, शासक के दरबार में कुछ लोग ऐसे भी थे, जो जैन धर्म विरोधी थे और वह पंडित टोडरमल की प्रतिभा और प्रसिद्धि से जलते थे। टोडरमल की सबसे प्रसिद्ध पुस्तक मोक्षमार्ग है। इस पुस्तक ने इन्हें अमर कर दिया है। कहा जाता है कि जब टोडरमल अपनी पुस्तक मोक्षमार्ग लिख रहे थे, तो वह सब कुछ भूलकर अध्ययन और लेखन में लगे रहते थे। उन्हें दूसरी कोई बात सूझती ही नहीं थी। एक दिन वह खाना खाने बैठे, तो दो-तीन कौर खाने के बाद उन्होंने अपनी मां से कहा कि मां आज आप शायद सब्जी में नमक डालना भूल गई हैं। मां हैरान होकर अपने बेटे को देखने लगीं, तो टोडरमल ने अपनी मां से कहा कि क्या मैंने कुछ गलत कहा? आप इस तरह मुझे चकित होकर क्यों देख रही हो? तब मां ने कहा कि मैं तुम्हारे सवाल का जवाब जरूर दूंगी, लेकिन पहले यह बताओ कि तुम्हारी पुस्तक पूरी हो गई। टोडरमल ने कहा कि हां, लेकिन यह बात आपको कैसे पता चली? अभी यह बात मैंने किसी को नहीं बताई है। तब मां ने कहा कि मैं कुछ दिनों से रोज खाने में कुछ न कुछ कमी छोड़ देती थी कि तुम्हारा ध्यान इस ओर जाएगा। लेकिन आज तुमने टोका, तो मैं समझ गई कि तुम्हारा काम पूरा हो गया है। इस पुस्तक ने टोडरमल को अमर कर दिया।

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