पौष पूर्णिमा के पावन स्नान (MAHAKUMBH 2025:)के साथ महाकुंभ मेला सोमवार से प्रयागराज में प्रारंभ हो गया। सूचना निदेशक शिशिर के अनुसार, सोमवार को दोपहर दो बजे तक एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर श्रद्धालुओं, संतों, महात्माओं और आगंतुकों का स्वागत करते हुए महाकुंभ के प्रथम स्नान की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इसे भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा का प्रतीक बताया।
तीर्थ पुरोहित(MAHAKUMBH 2025:) राजेंद्र मिश्र ने पौष पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिन गंगा स्नान से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। इसके साथ ही कल्पवास का एक माह का तपस्वी जीवन भी प्रारंभ हो गया, जिसमें श्रद्धालु गंगा स्नान, भजन-कीर्तन और तप करते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इस पवित्र आयोजन को भारतीय संस्कृति और मूल्यों का प्रतीक बताते हुए लिखा, “महाकुंभ 2025 में करोड़ों श्रद्धालु आस्था, समर्पण और संस्कृति के संगम में एकत्र हो रहे हैं। यह भारत की सनातन विरासत का द्योतक है। मैं सभी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के सुखद अनुभव की कामना करता हूं।”
मेला(MAHAKUMBH 2025:) क्षेत्र में नागा साधुओं का आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। किन्नर अखाड़े में भी बड़ी संख्या में लोग संतों का आशीर्वाद लेने पहुंचे। राजस्थान के बालोत्रा से आए दिलीप कुमार ने कहा, “यह देखकर खुशी हो रही है कि किन्नर अखाड़े के संत सनातन धर्म का प्रचार कर रहे हैं। यह समाज लंबे समय से उपेक्षित था, लेकिन कुंभ ने उन्हें अपनाया है, जो सराहनीय है।”
मुंबई से आए लाल जी भाई भानुशाली ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से किन्नर अखाड़े के बारे में जानकारी मिली। उनके साथ मुंबई और कच्छ (गुजरात) से करीब 1,500 लोग महाकुंभ में शामिल हुए। उन्होंने योगी सरकार और मेला प्रशासन की व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए कहा, “सफाई, शौचालय और पेयजल जैसी सुविधाएं अद्भुत हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने मेले को शानदार बनाया है।”
महाकुंभ 2025 न केवल आस्था और संस्कृति का महापर्व है, बल्कि यह भारतीय मूल्यों और विरासत का वैश्विक प्रदर्शन भी है।