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जागरूकता से ही हो सकता है साइबर ठगी से बचाव

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देश में साइबर ठगी के मामले दिनोंदिन बढ़ते जा रहे हैं। ठगी के ऐसे नायाब तरीके अपनाए जा रहे हैं जिनके बारे में जानकर हैरत होती है। बिहार में तो एक ऐसा मामला सामने आया था जिसके बारे में जानकर लोगों ने दांतों तले अंगुली दबा ली थी। बिहार में सैकड़ों लोगों को महिला के साथ रात बिताकर उसे गर्भवती करने के एवज में लाखों रुपये देने का वायदा साइबर ठगों ने किया और उनसे रजिस्ट्रेशन, इंट्री फीस और कागजात बनवाने के नाम पर लाखों रुपये ठग लिए गए। हरियाणा में नूंह और फरीदाबाद जैसे जिलों में भी साइबर ठगों की भारी तादाद मौजूद होने की खबर है। अभी हाल में ही फरीदाबाद निवासी को साइबर ठगों ने अमेरिकी पुलिस बनकर 46 लाख रुपये ठग लिए।

फरीदाबाद के ठगे गए व्यक्ति का बेटा अमेरिका में रहता है। एक दिन उसके पास साइबर ठगों ने फोन करके बताया कि उसके बेटे को अमेरिकन पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह खबर सुनकर परेशान हुए पिता ने अपने बेटे को बचाने की गुहार लगाई तो साइबर ठगों ने 46 लाख रुपये की चपत लगा दी। साइबर ठग कब और किसे किस तरीके से ठग लेंगे, यह नहीं जाना जा सकता है। इनके गिरफ्त में वे लोग ज्यादा आते हैं जो सीधे-सादे होते हैं।

जब कोई साइबर ठग अपना टारगेट फिक्स करता है, तो सबसे पहले उसका बैकग्राउंड पता करता है। उसके बाद बुना जाता है एक जाल। जो उसमें फंस जाता है, उसको ये साइबर ठग कंगाल करके ही छोड़ते हैं। कई बार तो हनी ट्रैप में फंसाकर उनको ब्लैकमेल तक किया जाता है। पुलिस ने देशभर में 49 ऐसे स्पॉट चिन्हित किए हैं जहां से पूरे देश में साइबर ठगी को अंजाम दिया जा रहा है। हरियाणा की सीमा से सटे राजस्थान में 32 ऐसी जगहें हैं। हरियाणा में बीते साल साइबर ठगी के 193 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 117 मामलों कोे पुलिस ने सुलझा लिया था और 423 साइबर ठगों को जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया था।

पुलिस ने इस साइबर ठगों को गिरफ्तार करके साढ़े पांच करोड़ से अधिक की रिकवरी की थी। पिछले साल नूंह में 27/28 अप्रैल की मध्यरात्रि को पांच हजार पुलिसकर्मियों की 102 टीमों ने 14 गांवों में एक साथ छापेमारी की थी। इस दौरान करीब 125 संदिग्ध हैकर्स को हिरासत में लिया गया था। इनमें से 66 आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। ये सभी लोग साइबर ठगी और हैकिंग में लगे हुए थे। इस तरह की ठगी से बचने का एक ही उपाय है और वह है जागरूकता। यदि किसी को यह आशंका होती है कि उसकी आईडी या फोन का गलत उपयोग हो रहा है, तो वह इसकी सूचना टैफकान, सीइआईआर, केवाईएम या एम आधार जैसे पोर्टल पर दे सकता है। इन पर शिकायत दर्ज होते ही तत्काल कार्रवाई होती है।

-संजय मग्गू

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