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थोड़ा सा ही सही राहुल का कद बढ़ा

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कांग्रेस नेता और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा 4 जून को खत्म हो चुकी है। अब इस यात्रा से राहुल गांधी ने क्या खोया और क्या पाया, इसकी समीक्षा हो रही है। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि राहुल गांधी अपनी पूरी यात्रा के दौरान टीवी चैनलों और प्रिंट मीडिया में प्रशंसात्मक खबरों के लिए कम और राहुल विरोधी खबरों के लिए अधिक छाए रहे। अब जब राहुल के पक्ष या विपक्ष में चलने वाली खबरों की आंच धीमी पड़ चुकी है, तो राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा का सम्यक विवेचन जरूरी है। वैसे हिंदुस्तान में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को सेक्युलर बताने या प्रधानमंत्री की विदेश में आलोचना करने को लेकर भाजपा यहां मुखर है। भाजपा का छोटे से लेकर बड़े नेता तक राहुल गांधी की आलोचना कर रहे हैं।

उन पर देश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपमान का आरोप लगा रहे हैं। इसी जून महीने के तीसरे हफ्ते में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजकीय यात्रा पर अमेरिका जाना है। उससे पहले राहुल गांधी के अमेरिका में प्रधानमंत्री की आलोचना से भाजपा काफी चिढ़ी हुई है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी अमेरिका में प्रधानमंत्री के पक्ष चलने वाली लहर को डिस्टर्ब करने गए थे? इसका सीधा-सीधा जवाब नहीं दिया जा सकता है। लेकिन यह सही है कि राहुल गांधी भारतीय मूल के उन अमेरिकी नागरिकों को अपने पक्ष में करने गए थे जो पीएम मोदी की नीतियों से असंतुष्ट हैं। अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं।

ऐसे में भाजपा और कांग्रेस सहित सभी दलों को उन एनआरआईज के सहयोग और समर्थन की जरूरत पड़ेगी जो यहां आकर वोट करते हैं या फिर वहीं से अपने परिजनों और दोस्तो को फोन करके प्रभावित कर सकते हैं। वे अपने पसंदीदा नेता के पक्ष में देश आकर या अमेरिका में ही रहकर कैंपेन चलाते हैं। यही नहीं, चुनाव के दौरान भारतीय अमेरिकी इन राजनीतिक दलों को एक बड़ी रकम चंदे के रूप में देते हैं। पिछले नौ दस सालों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय अमेरिकियों से संवाद करके उन्हें भाजपा के पक्ष में करने में सफलता हासिल कर ली है। अब यही प्रयास करने राहुल गांधी अमेरिका गए थे।

इस समय राहुल गांधी न तो सांसद हैं, न ही कांग्रेस के किसी पद पर हैं, ऐसे में जिस तरह राहुल गांधी को अमेरिका के विभिन्न शहरों में सुना गया, उसको देखते हुए कहा जा सकता है कि लोग अब राहुल गांधी को सुनना चाहते हैं। भारतीय डायस्पोरा के लोगों ने जिस तरह उनका स्वागत किया है, उससे भारतीय अमेरिकी लोगों की यह शिकायत भी दूर हो गई कि पीएम मोदी के अलावा भारत का दूसरा कोई नेता उनसे मिलने या बातचीत करने नहीं आता है।

देश हो या विदेश, पीएम मोदी सिर्फ अपनी बात रखते हैं, लोगों को सवाल पूछने का हक नहीं देते हैं, लेकिन राहुल गांधी ने जिस तरह लोगों से संवाद किया, उनके सवालों का जवाब दिया, उससे यकीनन राहुल गांधी का भले ही थोड़ा सा ही सही, लेकिन कद बढ़ा जरूर है। उनके विचारों और नीतियों से भारतीय डायस्पोरा के लोग परिचित जरूर हुए हैं। यही राहुल गांधी की उपलब्धि है।

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