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कार्रवाई न होने पर सरेआम चल रही मिलावटखोर खाद्य पदार्थ विक्रेताओं की दुकानें

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देश रोजाना, पलवल

खाद्य सुरक्षा विभाग दूध व दूध से बने पदार्थों तथा अन्य खाद्य सामग्री के सैंपल तो लेता है, लेकिन सैंपल फेल होने वालों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया जाता है। इसका प्रमाण गत वर्ष त्यौहारी सीजन में जिले में लिए गए 162 सैंपल में से 43 सैंपल फेल पाए गए। 23 सैंपल तो दूध से बने उत्पादों के फेल मिले, लेकिन कार्रवाई एक के भी खिलाफ नहीं की गई है। यही कारण है कि जिले में त्यौहारी सीजन में मिठाइयों व दूध से बनने वाले अन्य उत्पादों में मिलावट जमकर की जाती है। इस बार भी तीज व रक्षाबंधन पर्व को लेकर निर्मित होने वाली मिठाइयों में जमकर मिलावट का खेल चल रहा है।

जिले में खोया, पनीर, दूध व दूध से बनी अन्य खाद्य वस्तुओं में मिलावट का कारोबार बड़े स्तर पर चल रहा है। शादी और त्यौहारी मौसम आते ही मिलावट करने वाले ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। बाजारों में मिलावटी मिठाइयां बिकनी शुरू हो जाती हैं। लोग सड़कों पर तख्त व रेहडियों पर मिठाइयां बेचना शुरू कर देते हैं। इसके अलावा बाजारों में आ रहा खोवा व पनीर भी काफी मिलावटी आ रहा है। पिछले दिनों हथीन व नूंह क्षेत्र में नकली पनीर व खोवा बनाने वाली फैक्ट्री पकड़़ी गईं, लेकिन उसके बाद भी प्रशासन व खाद्य सुरक्षा विभाग इन पर अंकुश नहीं लगाया जा सका।

शैंपू और डिटरजेंट का प्रयोग

सूत्रों का कहना है कि मिलावटी दूध से बने उत्पाद में शैंपू तथा डिटर्जेंट पाउडर, हाइड्रोजन परआक्साईड, मेलामाइन, पामोलीन आयल का प्रयोग किया जाता है। बताया गया कि मिलावटी दूध तो जिले में इस कदर बिक रहा है कि यदि किसी व्यक्ति को एक हजार लीटर दूध चाहिए तो मात्र एक घंटा के एक हजार लीटर दूध मिल जाएगा। इसी तरह से पनीर व खोया की भी खपत है। उत्तर प्रदेश के कोसी व अलीगढ़ क्षेत्र के गांवों में कई जगह इस तरह की नकली फैक्ट्री चल रहीं हैं। वहां से दिल्ली, फरीदाबाद व गुरूग्राम तक मिलावटी पनीर व खोवा सप्लाई किया जाता है। मिलावटखोर 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिलावट करके एक किलो पनीर तैयार कर लेते हैं। नकली पनीर को बाजार में 200 से 300 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेच दिया जाता है।

दूध उत्पादन कम और मांग बहुत ज्यादा

जिले में जितने भी दूध का उत्पादन होता है, उसमें से करीब 70 प्रतिशत दूध अमूल, वीटा जैसी बड़ी डेयरियों और पशुपालकों द्वारा दिल्ली-एनसीआर में बिक्री कर दिया जाता है। बचे हुए दूध और उसके उत्पादों की आपूर्ति जिला में होती है। जिला में दूध का उत्पादन कम है और खपत बहुत ज्यादा है। इसी का मिलावटखोर फायदा उठाते हैं।

हथीन में पकड़ी नकली पनीर फैक्टरी

जिले में 70 प्रतिशत तक मिलावटी दूध उत्पाद बेचे जा रहे हैं। वर्ष 2021 के अक्टूबर माह में हथीन के गांव भीमसीका में नकली पनीर बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ था। फैक्ट्री में 3,000 किलो की खेप पकड़ी गई थी।

बच्चों के ग्रोथ पर असर

डिप्टी सीएमओ डॉ सुरेश बड़ोलिया ने बताया कि मिलावटी दूध व दूध से बने उत्पाद सेहत के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। इससे कैंसर होता है। किडनी और लीवर भी खराब होने का खतरा रहता है। पेट में संक्रमण और छोटे बच्चों की ग्रोथ पर भी असर होता है

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