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प्रदेश के नाराज सरपंचों को मनाने की तैयारी में सरकार

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लोकसभा चुनावों में पांच सीटें गंवा चुकी भाजपा विधानसभा चुनावों में किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहती है। यह वजह है कि भाजपा उन लोगों को मनाने में जुट गई है, जो उससे नाराज हैं। नाराज लोगों को मनाने के साथ-साथ भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं को भी सक्रिय होने का निर्देश दिया है। तीसरी बार प्रदेश की सत्ता में आने का रोडमैप बनाने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। जगह-जगह बैठकें की जा रही हैं, हार के कारणों की समीक्षा हो रही है। लोकसभा चुनाव में हुई चूक का पता लगाया जा रहा है। मंथन पर मंथन का दौर जारी है। सौ दिनों में सरकार की नीतियों को प्रदेश के सभी बूथों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

कुरुक्षेत्र में होने वाली चुनावी बैठक में प्रदेश के सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अलावा कई केंद्रीय मंत्री भी भाग ले सकते हैं। कहा जा रहा है कि इसी बैठक के बाद सरपंचों को दस लाख रुपये तक बिना ई टेंडरिंग के काम कराने का अधिकार दिया जा सकता है। अभी उन्हें पांच लाख रुपये खर्च करने का अधिकार है। इससे अधिक राशि वाले काम कराने के लिए ई टेंडरिंग का प्रावधान है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जब सरपंचों के अधिकारों को सीमित कर दिया था, तब से सरपंच अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्थानीय निकायों में होने वाले भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए ई टेंडरिंग का प्रावधान लागू किया था, लेकिन प्रदेश के सभी सरपंचों ने इसका विरोध किया था। उन्होंने अपना विरोध जताने के लिए कई बार आंदोलन किए।

मुख्यमंत्री और प्रशासन से कई दौर की वार्ताएं हुईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। सरपंच अपनी मांग पर अड़े रहे। सरपंचों की नाराजगी उस समय और बढ़ गई जब सरकार द्वारा मंजूर किए गए ग्रांट की रकम खर्च न होने पर सरपंचों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई। इस मामले में सरपंचों का कहना है कि अधिकारियों की वजह से फंड लैप्स होते हैं। उन्हें दंडित करने की जगह सरपंचों को क्यों दंडित किया जाएगा। सरपंचों की नाराजगी तब और चरम पर पहुंच गई, जब ग्राम पंचायतों के कार्य सीमित कर दिए गए।

सरकार ने आदेश जारी करते हुए कहा कि अब ग्राम पंचायतें केवल 19 प्रकार के ही काम करा पाएंगे। पंचायत समिति को सात और जिला परिषदों को 13 विकास कार्य कराने के लिए अधिकृत किया गया। सरपंचों की नाराजगी लोकसभा चुनावों के दौरान मतदान से व्यक्त हुई और भाजपा पांच सीटें हार गई। अब भाजपा सरकार सरपंचों के दस लाख तक काम कराने की सीमा बढ़ाने जा रही है। हालांकि सरपंच एसोसिएशन के अध्यक्ष रणवीर समैण सरपंचों को काम कराने का अधिकार देने की मांग कर रहे हैं।

-संजय मग्गू

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