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डॉक्टर और मरीज के परिजनों की मनमानी पर अंकुश की तैयारी

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किसी भी मरीज और डॉक्टर का रिश्ता विश्वास पर आधारित होता है। जब वह अपने किसी रोग की समस्या को लेकर डॉक्टर के पास आता है, तो उसे इस बात का विश्वास होता है कि डॉक्टर उनके रोग को ठीक कर देगा और उनके रोग के बारे में किसी से भी चर्चा नहीं करेगा। लगभग सभी डॉक्टर ऐसा करते भी हैं। डॉक्टर अपने मरीज और उसके रोगों की जानकारी की गोपनीयता को लेकर सतर्क भी रहते हैं।

यही वजह है कि डॉक्टरों को धरती का भगवान कहा जाता है। कहते हैं कि भगवान इंसान को जन्म देता है, लेकिन दुर्घटना होने या किसी घातक रोग का इलाज करके डॉक्टर मरीज को दूसरा जन्म देता है। यही वजह है कि किसी भी चिकित्सक का महत्व किसी भगवान से कम नहीं होता है। लेकिन कुछ डॉक्टर और अस्पताल ऐसा नहीं करते हैं। डॉक्टर का काम इंसानियत की सेवा करना है। उसे अपना परिवार चलाने के लिए धन चाहिए, तो वह एक निर्धारित फीस लेकर चिकित्सा करता है। यह कोई बुरा नहीं है।

हां, यदि कभी कोई जरूरतमंद और गरीब व्यक्ति अपना इलाज कराने आ जाए, तो चिकित्सक को इलाज करने से इनकार नहीं करना चाहिए। अगर कोई चिकित्सक सौ मरीजों से फीस लेता है, तो एकाध मरीजों का मुफ्त में इलाज करने से कोई बहुत ज्यादा नुकसान नहीं होता है। लेकिन आमतौर पर ऐसा होता नहीं है। पैसा न होने पर कई डॉक्टर तो इलाज करने से भी इनकार कर देते हैं। कुछ अस्पताल और नर्सिंग होम तो यदि किसी कारणवश मरीज की मौत हो जाए, तो बिना पूरा बिल वसूले मरीज का शव भी परिजनों को नहीं देते हैं। अस्पताल और नर्सिंग होम मौके को भुनाने की कोशिश करते हैं।

अब निकट भविष्य में कोई भी अस्पताल बिल न चुकाने के चलते किसी मरीज का शव देने से इनकार नहीं कर पाएगा। यदि कोई अस्पताल, नर्सिंग होम या क्लीनिक ऐसा करता है, तो प्रदेश सरकार उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। जब कोई व्यक्ति हादसे का शिकार होता है या किसी गंभीर रोग से पीड़ित होता है, तो उसके परिजन मरीज का जीवन बचाने के लिए किसी अस्पताल में लेकर आते हैं। कई बार इलाज इतना महंगा हो जाता है कि वह उनके वश के बाहर हो जाता है। ऐसे में अस्पताल मरीज का शव देने से इनकार कर देते हैं।

कई बार ऐसा भी होता है कि मरीज की मौत होने पर परिजन अस्पताल पर ही अपना गुस्सा निकालने लगते हैं। यह लोग अपना गुस्सा और मौत का मुआवजा मांगने के लिए सड़क पर धरना-प्रदर्शन करने लगते हैं। सड़क जाम कर देते हैं। परिजन सोचते हैं कि जाने वाला तो चला गया क्यों न अस्पताल पर आरोप मढ़कर कुछ पैसे ही हासिल कर लिए जाएं। हालांकि दोनों बातें कभी-कभी होती हैं, लेकिन अब लोग शव लेकर सड़क पर प्रदर्शन भी नहीं कर पाएंगे।

-संजय मग्गू

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