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डॉक्टरेट की दो-दो उपाधियों से सम्मानित हुए गौरव

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समाजसेवा के क्षेत्र में असाधारण कार्य के लिए गौरव कुमार (Gaurav Kumar) को दो विदेशी विश्वविद्यालयों की तरफ से डॉक्टरेट की उपाधि से पिछले दिनों सम्मानित किया गया। सम्मान कार्यक्रम नोएडा (Noida) के निजी होटल में आयोजित किया गया था, जिसमें कुल 30 से ज्यादा लोगों को विभिन्न क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय काम के लिए डॉक्टरेट का सम्मान दिया गया। इस मौके पर थोड़ा भावुक होते हुए गौरव कुमार ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और दोस्तों को दिया। पत्नी के साथ का खास जिक्र करते हुए गौरव ने कहा कि उनकी सोहबत और संघर्ष ने मुझे इस क्षेत्र में काम करने की असीम ताकत दी। गौरव को डॉक्टरेट का पहला सम्मान ‘इलियोर इवांगगेलिकल विश्वविद्यालय-हैती” ने कोरोना काल में उनकी कर्मठता और जिजिविषा को देखते हुए डॉक्टरेट की उपाधि से नवाजा। वहीं डॉक्टरेट की एक और उपाधि गौरव कुमार को याब्राा विश्वविद्यालय ने दिया। याब्राा विश्वविद्यालय ने उन्हें यह सम्मान सामाजिक एवं सामुदायिक विकास में उल्लेखनीय कार्य के लिए दिया गया।

गौरतलब है कि कोरोना के वक्त जब लोग अपने घरों में दुबके हुए थे और सरकारी अमला भी शिथिल पड़ा हुआ था तब इंदिरापुरम गाजियाबाद स्थित ‘खालसा हेल्प” संगठन के बैनर तले गौरव और उनके संगी-साथियों ने मरीजों की बिना झिझक मदद की। अपने जुझारूपन के लिए मशहूर गौरव (Gaurav Kumar) ने उस वक्त न तो अपनी चिंता की आैर न अपने परिवार की। उस वक्त उनमें उस महामारी से लड़ रहे मरीजों और उनके घरवालों का इलाज करना ही एकमात्र लक्ष्य था। उनके और उनकी टीम के इस हौसले आैर साहस का उत्तर प्रदेश सरकार के अलावा देश भर के स्वयंसेवी संगठनों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की थी आैर उन्हें सम्मानित भी किया था।

वाकई यह क्षण बेहद खास है क्योंकि गौरव कुमार (Gaurav Kumar) ने गाजियाबाद में इंदिरापुरम में हेल्थ क्लिनिक चलाने और सैकड़ों मरीजों का इलाज करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। वो आज भी वहां आने वाले मरीजों का नि:शुल्क सलाज करते हैं। गाजियाबाद औरबिहार के लिए बेहद खुशी की बात है कि हमारे बीच गौरव कुमार जैसी शख्सियत मौजूद हैं जो बिना किसी डर, भय और हिचक के मरीजों के लिए अपनी जान की बाजी लगा दें। बिहार के एक छोटे से गांव हवेली खड़गपुर (जिला मुंगेर) से 2003 में दिल्ली आए गौरव ने इंश्योरेंस कंपनी में काफी वर्ष काम किया। फिर बिहार से आए मरीजों को इलाज में आने वाली दुश्वारियों ने इन्हें इस तरफ आकर्षित किया। तकरीबन 20 वर्ष से गौरव न केवल बिहार बल्कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्यों के मरीजों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।

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