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विवेक से बुराइयों को काबू में रखता हूं

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ज्योतिष शास्त्र का आविष्कार कब हुआ, इसके बारे में कोई पक्की जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह सही है कि सदियों से पूरी दुनिया में ज्योतिष शास्त्र को मानने वाले लोग रहे हैं। वैसे ज्योतिष शास्त्र विज्ञान का ही एक अंग रहा है। लेकिन इसके नाम पर कमाई करने वाले भी कम नहीं रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में चेहरा या हाथ को देखकर भविष्य बताने जैसी बेतुकी बातें भी समय-समय पर होती रही हैं। कोई भी ज्योतिष शास्त्री किसी व्यक्ति के जन्म, मृत्यु आदि की एकदम सटीक जानकारी नहीं दे सकता है। एक बार की बात है।

यूनान के महान दार्शनिक सुकरात अपने शिष्यों के साथ बैठे किसी विषय में वार्तालाप कर रहे थे। तभी वहां पर एक ज्योतिषी आया और उसने वार्तालाप के बीच में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मैं किसी का भी चेहरा देखकर उसके बारे में एकदम सटीक बात बता सकता हूं। बताओ, कौन अपने बारे में जानना चाहता है। सुकरात ने उस ज्योतिषी से कहा कि मेरे बारे में कुछ बताइए। उस आदमी ने सुकरात के कुरूप चेहरे की ओर देखते हुए अभिमान से कहा कि तुम्हारा चेहरा बता रहा है कि तुम अत्यंत क्रोधी और अभिमानी व्यक्ति हो।

तुम्हारे माथे की बनावट बताती है कि तुम अत्यंत कपटी और लालची हो। तुम्हारी ठुड्डी की बनावट से पता चलता है कि तुम सत्ता विरोधी हो। तुम सत्ता विरोध में झूठ भी बोल सकते हो। यह सुनकर सुकरात मुस्कुराए और उन्होंने ज्योतिषी को पैसे देकर विदा कर दिया। ज्योतिषी की बात सुनकर वहां उपस्थिति लोग नाराज हो उठे। उन्होंने सुकरात से कहा कि आपने उसको पैसे देकर विदा क्यों कर दिया। उसने सब कुछ तो गलत कहा था। सुकरात ने मुस्कुराते हुए कहा कि उसने सही कहा था। मैं वैसा ही हूं, लेकिन मैं अपने विवेक से इन बुराइयों पर काबू रखता हूं। यह वह ज्योतिषी नहीं देख पाया।

Ashok Mishra

-अशोक मिश्र

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