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India International Relation: जानें, विदेश मामलों के लिहाज से कैसा रहा भारत के लिए 2023?

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भू-राजनीतिक उथल-पुथल और सत्ता की प्रतिद्वंद्विता से भरे साल 2023 में भारत ने जी20 के सदस्य देशों को प्रमुख वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए एक महत्वाकांक्षी रूपरेखा सर्वसम्मति से अपनाने के वास्ते तैयार करने में अपनी कुशल रणनीति का प्रदर्शन किया। साथ ही चीन के बढ़ते आक्रामक रवैये के बीच अपनी रणनीतिक ताकत का पड़ोस और उससे आगे विस्तार करने के लिए एक दृढ़ दृष्टिकोण अपनाया।

2023 में 55 देशों वाले अफ्रीकी संघ को जी20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल कराना और यूक्रेन संघर्ष को लेकर गहरे मतभेदों पर पार पाते हुए लीडर्स डिक्लरेशन पेश करना दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के समूह की भारत की अध्यक्षता के प्रमुख मील के पत्थर के रूप में देखा गया। ऐसा पहली बार हुआ कि भारत ने वार्षिक जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की और नई दिल्ली ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक सहित समूह के शीर्ष नेताओं का भव्य स्वागत किया।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूस के व्लादिमीर पुतिन शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं हुए। भारत की जी20 अध्यक्षता 30 नवंबर को समाप्त हुई। भारत ने इस दौरान देश भर के लगभग 60 शहरों में 200 से अधिक बैठकों की मेजबानी की, जिसमें समावेशी विकास, डिजिटल नवाचार, जलवायु वित्तपोषण और न्यायसंगत वैश्विक स्वास्थ्य पहुंच जैसे विभिन्न मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया जिसका उद्देश्य ‘ग्लोबल साउथ’ या विकासशील देशों को लाभ पहुंचाना था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी20 शिखर सम्मेलन में कहा, ‘‘21वीं सदी एक ऐसा समय है जो पूरी दुनिया को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है।” जी20 नई दिल्ली लीडर्स डिक्लरेशन में लगभग 83 पैरा और 87 परिणाम शामिल थे, जिसमें सहयोग के व्यापक क्षेत्रों के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रों सहित कुछ गंभीर वैश्विक चुनौतियों के संभावित समाधान शामिल थे। इसमें शीर्ष पर सऊदी अरब, भारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच रेल और शिपिंग नेटवर्क को शामिल करने वाले एक महत्वाकांक्षी आर्थिक गलियारे को शुरू करने के लिए जी20 शिखर सम्मेलन के इतर एक घोषणा की गई थी। इसे एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाला कदम करार दिया गया।

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के मुकाबले के लिए समान विचारधारा वाले देशों द्वारा पेश एक पहल के रूप में भी देखा जाता है। चीन के बीआरआई को पारदर्शिता की कमी और राष्ट्रों की संप्रभुता का सम्मान नहीं करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है। समग्र नीति ढांचे में, भारत ने भू-राजनीतिक उथल-पुथल और अमेरिका और रूस-चीन गठजोड़ के बीच शक्ति प्रतिद्वंद्विता की पृष्ठभूमि के खिलाफ एक स्वतंत्र, खुला और समावेशी हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने के प्रति अपना स्पष्ट दृष्टिकोण बरकरार रखा।

वर्ष 2023 में भारत ने पूर्वी लद्दाख के साथ-साथ हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की सैन्य आक्रमकता के सामने अपने रणनीतिक हितों के लिए अनुकूल क्षेत्रीय माहौल तैयार करने के अपने दृढ़ संकल्प को जारी रखा। चीन पर अपनी नीति के अनुरूप, भारत ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति भंग होने की स्थिति में दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य नहीं हो सकते। अगस्त में, मोदी और शी ने जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन के इतर एक संक्षिप्त और अनौपचारिक बातचीत की। बातचीत में, मोदी ने शी को पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर “अनसुलझे” मुद्दों पर भारत की चिंताओं से अवगत कराया और रेखांकित किया कि भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना आवश्यक है।

विकासशील देशों, विशेष रूप से अफ्रीकी महाद्वीप के लिए अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप, भारत ने दो ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलनों की डिजिटल प्रारूप में मेजबानी की। इसमें से पहला शिखर सम्मेलन जनवरी में और दूसरा नवंबर में आयोजित किया गया। इनका उद्देश्य विभिन्न वैश्विक घटनाक्रमों से उत्पन्न चुनौतियों को दूर करने और अधिक समावेशी विश्व व्यवस्था सुनिश्चित करने के तरीकों का पता लगाना था। भारत की विदेश नीति की प्राथमिकता का एक महत्वपूर्ण पहलू ग्लोबल साउथ या विकासशील देशों की चिंताओं, चुनौतियों और आकांक्षाओं को उजागर करने वाली एक अग्रणी आवाज के रूप में खुद को स्थापित करने का संकल्प था। भारत ने अपने पड़ोस, पश्चिम एशिया, यूरोप और अफ्रीका में मित्र देशों के साथ जुड़ाव बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया।

18 जून को कनाडा के सरे शहर में एक गुरुद्वारे के बाहर खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की “संभावित” संलिप्तता का कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा सितंबर में आरोप लगाए जाने के बाद भारत-कनाडा संबंधों में गंभीर तनाव आ गया। नई दिल्ली ने ट्रूडो के आरोपों को “बेतुका” और “प्रेरित” बताकर खारिज कर दिया और कनाडा पर भारत को निशाना बनाने वाले खालिस्तानी चरमपंथियों को पनाह देने का आरोप लगाया। ट्रूडो के आरोपों के कुछ सप्ताह बाद, दोनों देशों के बीच राजनयिक मौजूदगी में समानता सुनिश्चित करने की नयी दिल्ली की मांग के बाद कनाडा ने 41 राजनयिकों को भारत से वापस बुला लिया।

एक अन्य घटनाक्रम में, गत नवंबर में अमेरिकी संघीय अभियोजकों ने भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता पर अमेरिकी धरती पर सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू को मारने की नाकाम साजिश में एक भारतीय सरकारी कर्मचारी के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया। आतंकवाद संबंधी आरोप में भारत में वांछित पन्नू के पास अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता है। भारत ने आरोपों की जांच के लिए एक जांच समिति का गठन किया। अमेरिकी अभियोजकों द्वारा आरोप लगाये जाने के बावजूद, नई दिल्ली और वाशिंगटन के समग्र संबंध 2023 में और प्रगाढ़ हुए।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी की जून में वाशिंगटन की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा और उसके बाद सितंबर में G20 शिखर सम्मेलन के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन की भारत यात्रा हुई। भारत-अमेरिका संबंधों का एक प्रमुख पहलू ‘इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज (आईसीईटी)’ के तहत सेमीकंडक्टर, अगली पीढ़ी के दूरसंचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रक्षा सहित सात विशिष्ट उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग था।

अक्टूबर में, कतर की एक अदालत ने आठ पूर्व भारतीय नौसैनिकों को मौत की सजा सुना दी। इसको लेकर भारत में चिंता उत्पन्न हो गई। हालांकि, दिसंबर में कतर की अपील अदालत ने कुछ राहत देते हुए मौत की सजा बदल दी और उन्हें अलग-अलग अवधि के लिए जेल की सजा दी। भारत ने हमास-इजराइल संघर्ष पर अत्यंत नपी तुली प्रतिक्रिया जतायी। भारत ने हमास द्वारा इज़राइल पर 7 अक्टूबर को किए गए हमलों की कड़ी निंदा की, साथ ही नयी दिल्ली ने संघर्ष का “बातचीत और कूटनीति” के माध्यम जल्द ही शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया। नई दिल्ली ने साथ ही फलस्तीन मुद्दे पर दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में सीधी शांति वार्ता जल्द से जल्द फिर से शुरू करने के लिए स्थितियां बनाने का भी आह्वान किया।

यूक्रेन संघर्ष पर भी भारत ने कहा कि समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकाला जाना चाहिए। वर्ष 2023 के दौरान भारत ने पाकिस्तान को लेकर अपना यह रुख बरकरार रखा कि इस्लामाबाद के साथ तब तक कोई बातचीत नहीं हो सकती जब तक कि वह सीमा पार आतंकवाद को बंद नहीं कर देता। भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ-साथ कई पश्चिमी देशों के साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार पर भी ध्यान केंद्रित किया।

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