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पीएम मोदी के लिए नायडू और नीतीश को साधना आसान होगा!

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चार जून को आए जनादेश से यह संकेत एकदम साफ है कि भाजपा जीत कर भी हार गई और इंडिया गठबंधन हारकर भी जीत गया। दरअसल, भाजपा ने चुनाव शुरू होने से काफी पहले से ही भाजपा को 370 और एनडीए को चार सौ पार का गुब्बारा फुलाना शुरू कर दिया था। चार सौ पार के गुब्बारे में इतनी हवा भर दी गई कि जब वह चार जून को फूटा तो हालत काफी हास्यास्पद जैसी हो गई। विदेशी मीडिया में भी लगभग कुछ ऐसी ही बातें कही गई हैं। लगभग सभी विदेशी मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में पीएम मोदी की छवि कमजोर होने की बात कही है। सबका यही आकलन है कि भाजपा और पीएम मोदी ने अपनी सीटों का लक्ष्य निर्धारित करने में थोड़ी जल्दबाजी की और मतदाताओं की मनोदशा का ख्याल नहीं रखा। अब जबकि एनडीए को बहुमत मिल गया है, तो सरकार बनेगी भी। लेकिन वह टीडीपी के नेता चंद्रबाबू नायडू और जनता दल यूनाइटेड के नीतीश कुमार के रहमोकरम पर ही रहेगी।

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इन दोनों नेताओं की बैसाखी के बिना अब एनडीए सरकार की कल्पना नहीं की जा सकती है। यह दोनों नेता वही हैं जो चुनाव से कुछ महीनों पहले तक भाजपा और एनडीए विरोध का झंडा उठाए फिर रहे थे। अभी चुनाव का फैसला आए हुए दो ही दिन हुए हैं। भाजपा की बैसाखी बनने का सुख उठाते हुए मुश्किल से 48 घंटे ही बीते हैं। यह सुख नायडू और नीतीश कुमार कितने दिन उठा पाते हैं, यह समय ही बताएगा। वैसे ये दोनों नेता इस बात से भी वाकिफ हैं कि वर्ष 2002 से लेकर 2024 तक नरेंद्र मोदी तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री और दो बार प्रधानमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। इन 23 वर्षों में भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकारें रही हैं। पीएम मोदी ने जब जैसा चाहा, वैसे शासन किया है। सत्ता का केंद्रीयकरण उनकी पहचान रही है। अब जब भाजपा के पास 240 सीटें ही हैं, तो ऐसी स्थिति में सरकार चलाने के लिए नायडू और नीतीश कुमार अनिवार्य हो जाते हैं। एनडीए गठबंधन को 292 सीटें मिली हैं।

सरकार बनाने के लिए 272 का आंकड़ा चाहिए। अगर टीडीपी की 16 सीटें और जदयू की 12 सीटों को जोड़ लें, तो 28 सीटें होती हैं। यदि एनडीए गठबंधन की 292 सीटों में से 28 सीटों को निकाल दें, तो कुल 264 सीटें ही बचती हैं यानी बहुमत से आठ सीटें कम। देश की राजनीति पर गहरी नजर रखने वाले इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि कभी भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा गठित एनडीए में चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार शामिल रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी एक समावेशी विचारधारा अपनाकर सबको साथ लेकर चल रहे थे।

वर्ष 1999 में बनने वाली एनडीए सरकार में कुल 24 दल शामिल थे और उन्होंने इन दलों के साथ पूरे पांच साल सरकार चलाई थी। अब पीएम मोदी के सामने यही चुनौती है कि वे सत्ता का विकेंद्रीकरण करें और वे अपने घटक दलों की सहमति के हिसाब से सरकार चलाएं। नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू ने अतीत में पीएम मोदी को या पीएम मोदी ने इन दोनों नेताओं को जो कड़वी बातें कही हैं, उन्हें बिसराने पर ही एनडीए सरकार पांच साल तक चलेगी। हालांकि इंडिया गठबंधन ने पुराने वीडियो शेयर करने भी शुरू कर दिए हैं जिनमें कड़वी बातें कही गई हैं।

-संजय मग्गू

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