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दसवीं में कभी पढ़ाया नहीं, पहुंच गए उत्तर पुस्तिकाएं जांचने

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कहा जाता है कि यदि किसी देश को बरबाद करना हो, उसे मानसिक गुलाम बनाना हो तो उस देश की शिक्षा व्यवस्था को ही बिगाड़ दो। शिक्षा व्यवस्था बिगड़ने से उस देश की भावी पीढ़ी अकमर्ण्य, डिग्रीधारी अशिक्षित और नकारा हो जाएगी। ऐसी शिक्षा व्यवस्था वाले देश को गुलाम बनाने के लिए कोई बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। यह बात कहीं न कहीं सच है। हमारे देश की शिक्षा का स्तर पिछले कई दशकों से लगातार गिरता जा रहा है। स्कूल, कालेज और विश्वविद्यालयों की संख्या तो लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन उनमें पढ़ने वाले और पढ़ाने वालों का बौद्धिक स्तर काफी निचले दर्ज का होता जा रहा है। देश की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति क्या है? इसको इस बात से भी समझा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में फामेर्सी प्रथम वर्ष के चार छात्रों को उत्तर पुस्तिकाओं में जय श्री राम और देश के क्रिकेट खिलाड़ियों का नाम लिखने पर भी पास कर दिया गया।

उत्तर पुस्तिका जांचने वाले प्रोफेसर ने उन्हें 56 प्रतिशत अंक दिए हैं। मामले के तूल पकड़ने पर सरकार ने कार्रवाई की है और उत्तर पुस्तिका जांचने वाले प्रोफेसरों को हटा दिया गया है। भिवानी स्थित हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की लापरवाही के चलते ही दसवीं कक्षा के लगभग तीन लाख छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ हुआ है। बोर्ड ने प्रदेश के 71 केंद्रों पर छह हजार से अधिक शिक्षकों की उत्तर पुस्तिकाओं से जांचने की ड्यूटी लगाई है। इनमें से दो सौ शिक्षकों ने दसवीं कक्षा में कभी पढ़ाया ही नहीं है और उनसे 18 हजार से अधिक कापियां जंचवाई गई हैं।

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जब इस मामले का खुलासा हुआ तो ऐसे शिक्षकों को ड्यूटी से हटा दिया गया है। लेकिन सवाल यह है कि जिन 18 हजार कापियों को जांचा गया है, उनका क्या होगा? नियम यह है कि दसवीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को जांचने का जिम्मा उन अध्यापकों को दिया जाता है जिन्होंने कम से कम तीन साल कक्षा दस में पढ़ाया हो। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों, कर्मचारियों की लापरवाही के चलते जिन छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ हुआ, उसका क्या होगा?

बोर्ड का तर्क है कि इन उत्तर पुस्तिकाओं को आंसर की से जांचा गया है, ऐसी स्थिति में इन कापियों को दोबारा जांचने की जरूरत नहीं है। यह बात कहकर बोर्ड के अधिकारी अपना पिंड तो छुड़ा सकते हैं, लेकिन इस बार दसवीं की परीक्षा में बैठने वाले तीन लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को अपने अंक को लेकर संशय तो हमेशा बना रहे है। दरअसल, यह प्रदेश की शिक्षा से किया गया खिलवाड़ है। वैसे ही प्रदेश बेरोजगारी के मामले में पूरे देश में अव्वल है। ऐसी शिक्षा व्यवस्था से प्रदेश की छवि और बिगड़ेगी।

Sanjay Maggu

-संजय मग्गू

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