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इस बार फायरिंग कर नहीं, पुलिस  की नाकामी से फरार  हुआ बीमार कैदी

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बीके अस्पताल की तीसरी मंजिल में कैदी वार्ड से मंगलवार सुबह हत्या के मामले का एक बंदी फरार हो गया। कुख्यात विकास दलाल के फरार होने के दौरान तो गोलियां चली थी। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। क्षय रोग से कैदी के कूल्हे की हड्डी में परेशानी थी। वह वॉकर के सहारे मुश्किल से चल पाता था। लेकिन कैदी गार्द में तैनात पुलिस कर्मचारियों की लापरवाही के कारण फरार होने में कामयाब हुआ है। सूत्रों के मुताबिक इस कैदी की सुरक्षा में तीन पुलिसकर्मी तैनात थे। लेकिन रात को उसके पास एक ही मौजूद था। वह भी वार्ड का दरवाजा लॉक किये बिना सो रहा था। बीके अस्पताल में गार्द के चंगुल से पहली बार कोई कैदी नहीं भागा है। पहले भी कैदियों के फरार होने की घटनाएं हो चुकी हैं। यदि इस कैदी की सुरक्षा में चार पुलिस कर्मी तैनात थे। लेकिन कैदी के फरार होने के दौरान एक कर्मी मौजूद था, वह भी सोया हुआ था। यदि कर्मी सतर्क रहते तो बीमार कैदी भागने में कामयाब नहीं होता।

दो हजार के लिए मारी थी गोली

तिगांव निवासी नवीस ने 22 मई 2021 को बल्लभगढ़ की टीका राम कालोनी में बहादुरपुर गांव निवासी मैकेनिक संजय को गोली मार दी थी। क्योंकि संजय ने नवीस को दो हजार रुपये की रंगदारी देने से मना कर दिया था। अस्पताल में उपचार के दौरान संजय की मौत हो गई थी। उस समय पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर नवीस को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जहां वह विचाराधीन कैदी के रूप में बंद था। बताया गया है कि इस दौरान नवीस क्षयरोग का शिकार हो गया था। क्षय रोग के कारण उसके कूल्हे की हड्डी में दिक्कत हो गई थी। तकलीफ बढ़ने पर उसे छह जून को बीके अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जल्दी ही कूल्हे की हड्डी का Operation होना था। लेकिन इससे पहले ही नवीस पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब हो गया।

किसने की भागने में मदद?

बीके अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटैज में तो नवीस तीसरी मंजिल से उतर कर अकेला ही बाहर निकलता दिखाई दे रहा है। लेकिन इसके बाद वह कैसे भागा, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है। नवीस का इलाज कर रहे डॉक्टर का कहना है कि नवीस की हालत ठीक नहीं थी। जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि उसे भगाने में किसी ने मदद की है। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक कैदी वार्ड में जब कोई दाखिल होता है तो उससे मिलने वाले परिजनों का तांता लगा रहता है। परिजन कई कई घंटे वार्ड में बैठकर बातें करते रहते हैं। तैनात पुलिसकर्मी भी उन्हें नहीं टोकते थे। नवीस से मिलने के लिए भी लोग आते रहते थे। सम्भव है, नवीस ने मिलने के दौरान गार्द की लापवाही का फायदा उठाकर किसी के साथ भागने की योजना बनाई थी।

पहले भी हो चुके हैं कैदी फरार

– 3 दिसंबर 2007 को बल्लभगढ़ उपजेल से सहदेव नामक कैदी हुआ था फरार।

– 20 सितम्बर 2008 को कैदी आदित्य उर्फ कात्या को यूपी पुलिस पर हमला कर छुड़ाया था।

– 3 अप्रैल 2009 को हथीन की अदालत पेशी के बाद बदमाश सल्ली को उसके साथी छुड़ा ले गए थे।

– 24 अक्टूबर 2009 को वैश्यावृति का आरोपी गौरव अदालत परिसर से हुआ था फरार।

– 24 सितम्बर 2009 को एनएच पांच के बाल सुधारगृह से एक किशोर हुआ था फरार।

– 3 जुलाई 2011 को अदालत में सजा सुनाए जाने के बाद शिवराम पुलिस को चकमा देकर हुआ था फरार।

– 17 मई 2012 को एनएच पांच स्थित बाल सुधारगृह से पांच किशोर हुए थे फरार।

– 10 अगस्त 2012 को अजरौंदा स्थित एक ढाबे से सुरेश और विकास नामक कैदी कैथल पुलिस को चकमा देकर हुए थे फरार।

– 26  अगस्त 2017 को 307 का आरोपी होडल निवासी रविंद्र फोर्टिज अस्पताल से हुआ फरार।

– 18 दिसंबर 2019 को दुष्कर्म आरोपी सोनू बीके के आपातकालीन कक्ष से हुआ था फरार।

लापरवाहों पर होगी कार्रवाई

कैदी के फरार होने की सूचना मिलने पर एसीपी क्राइम अमन यादव अपनी टीम के साथ बीके अस्पताल में पहुंचे और मौके का मुआयना किया। उन्होंने मीडिया को बताया कि कैदी छह-सात दिनों से दाखिल था। जांच में लापरवाही उजागर होने पर दोषी कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी। फरार कैदी की गिरफ्तारी के प्रयास जारी है। जल्दी उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

राजेश दास

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