Friday, June 21, 2024
42.5 C
Faridabad
इपेपर

रेडियो

No menu items!
HomeEducation News in hindi - DeshrojanaUCC : लिव-इन में रहना है तो आज ही जान लें इन...

UCC : लिव-इन में रहना है तो आज ही जान लें इन नियमों के बारे में…

Google News
Google News

- Advertisement -

उत्तराखंड में पास हुए यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) विधेयक में लिव-इन रिलेशन एक्ट 381 का प्रस्ताव रखा गया है। अगर बिल को राज्यपाल की मंजूरी मिल गई तो उत्तराखंड में लिव-इन में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी हो जाएगा। ऐसा न करने पर छह साल तक की जेल और 25,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है।

इस बिल में लिव-इन में पैदा होने वाले बच्चे को भी कानूनी अधिकार दिए गए हैं। साथ ही लिव-इन से ब्रेकअप के बाद लड़की अपने पार्टनर से गुजारा भत्ता भी मांग सकेगी।

Uniform Civil Code

इस बिल को 7 सवालों से समझें, जिनके जवाब सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता ने दिए हैं…

सवाल 1 : बिना रजिस्ट्रेशन के साथ रहने पर क्या सज़ा होगी?

जवाब : यदि जोड़ा अनिवार्य पंजीकरण नहीं करता है और एक साथ रहता है, तो 6 साल तक की सजा और 25,000 रुपये का जुर्माना देना होगा। लिव-इन रिलेशनशिप शुरू करने के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। उत्तराखंड में रहने वाले किसी भी राज्य के युवाओं को लिव-इन में रहने के लिए रजिस्ट्रार के सामने बयान देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही यदि उत्तराखंड राज्य का कोई युवा राज्य से बाहर लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है तो उसे उस राज्य में रजिस्ट्रार के समक्ष अपना स्टेटमेंट प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

लिव-इन रिलेशनशिप

सवाल 2 : लिव-इन के मानदंड कैसे तय होंगे, कौन-कौन से लोग इसमें शामिल होंगे?

जवाब : इसे अभी तक कानून के तहत स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है। हालांकि, कानूनी तौर पर लड़कियों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़कों के लिए 21 साल है। इस आयु सीमा से ऊपर के जोड़े अगर बिना शादी किए साथ रहते हैं तो इसे लिव-इन रिलेशनशिप माना जाएगा।

Live-in Relationships

सवाल 3 : लिव-इन में जन्म लेने वाले बच्चों को क्या कानूनी अधिकार मिलेंगे?

जवाब : यदि लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हुए बच्चे का जन्म होता है तो उस बच्चे को वैध संतान माना जाएगा।

यह भी पढ़ें : Hurry Up! इस नौकरी में पाएं 1 लाख से ज्यादा सैलरी, पास आ रही है लास्ट डेट

सवाल 4 : क्या यह पंजीकरण सभी लोगों के लिए अनिवार्य होगा?

जवाब : जिन लोगों के समुदाय (आदिवासी समुदाय और जनजाति) में शादी से पहले एक साथ रहने की प्रथा है, तो उन्हें पंजीकरण नहीं कराना होगा।

Child without Marriage

सवाल 5 : किस जोड़े का पंजीकरण नहीं किया जाएगा?

जवाब : यदि दोनों में से एक शादीशुदा है या दोनों में से एक नाबालिग है तो पंजीकरण नहीं किया जा सकता है।

सवाल 6 : पंजीकरण कैसे समाप्त किया जा सकता है?

जवाब : रजिस्टर्ड लिव-इन पार्टनर्स को भी रिश्ता खत्म करने के लिए रजिस्ट्रार से इजाजत लेनी होगी। रजिस्ट्रार लिव-इन पार्टनर्स की जांच के बाद आवेदन को टर्मिनेट कर देगा। इसमें लड़की को मेंटेनेंस मांगने का भी अधिकार होगा, जिसके लिए लड़की कोर्ट में अपील कर सकेगी।

सवाल 7 : क्या इसमें माता-पिता या परिवार की कोई भागीदारी होगी?

जवाब: इसका अधिकार रजिस्ट्रार के पास है। जरूरत पड़ने पर रजिस्ट्रार दोनों पार्टनर्स के अलावा किसी परिचित का भी स्टेटमेंट मांग सकेंगे। ऐसी स्थिति में रजिस्ट्रार अभिभावकों की सहमति भी मांग सकेंगे। इसके अलावा अगर वेरिफिकेशन के दौरान जोड़ा नाबालिग पाया जाता है तो उनके माता-पिता को इसकी जानकारी दी जाएगी।

खबरों के लिए जुड़े रहें : https://deshrojana.com/

- Advertisement -
RELATED ARTICLES
Desh Rojana News

Most Popular

Must Read

महात्मा बुद्ध ने समझाया, शरीर नश्वर है

जब कोई व्यक्ति अपने आराध्य के गुणों, कार्यों और वचनों को याद रखने, उनके बताए गए मार्ग का अनुसरण करने की जगह मूर्ति बनाकर...

भीषण अव्यवस्था का पर्याय बनते हरियाणा के सरकारी अस्पताल

हरियाणा के अस्पतालों में अव्यवस्था कम होने का नाम नहीं ले रही है। इन दिनों जब भीषण गर्मी और अन्य बीमारियों की वजह से...

जदयू सांसद ने कहीं पैरों पर कुल्हाड़ी तो नहीं मार ली!

जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर का मुस्लिम और यादवों को लेकर दिए गए बयान का असर बिहार की राजनीति में बहुत दिनों तक...

Recent Comments