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अफवाह रूपी एक चिंगारी पूरे समाज को जला सकती है

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एक मामूली सी अफवाह और सोशल मीडिया मिलकर समाज में भयावह स्थिति पैदा कर सकते हैं। अफवाहें सोशल मीडिया के दौर से पहले भी फैलाई जाती रही हैं, लेकिन उनका असर सीमित और धीरे-धीरे होता था। जब तक मामला तूल पकड़ता था, पुलिस और प्रशासन मामले को ठंडा कर देता था। सोशल मीडिया का गैरजिम्मेदाराना व्यवहार सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने में किस तरह बड़ी भूमिका निभा सकता है, इसका सबसे ताजातरीन उदाहरण हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में गौकशी की कथित अफवाह थी। सोशल मीडिया पर शामली में रहने वाले जावेद ने एक फोटो पोस्ट की थी जो किसी जानवर की कुर्बानी से जुड़ी थी और वीभत्स थी। शामली जिले का जावेद बीते दस सालों से नाहन में रेडीमेड कपड़ों की दुकान चलाता है। पिछले दिनों बकरीद पर अपने घर आया था। सोशल मीडिया पर पोस्ट देखते ही कुछ लोगों को लगा कि नाहन में ही कुर्बानी दी गई थी।

बस, उग्र भीड़ ने नाहन में चार दुकानों में तोड़फोड़ की। सांप्रदायिक नारे लगाए। हिमाचल पुलिस ने उत्तर प्रदेश पुलिस से संपर्क किया और मामले की छानबीन करने का अनुरोध किया। छानबीन के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने रिपोर्ट दी कि यहां ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। अफवाह और सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने नकारात्मक पोस्ट डालकर माहौल को इतना उग्र बना दिया कि भीड़ अपना संयम खो बैठी। हिमाचल प्रदेश में रहने वाले लोग काफी संयमित और उदार माने जाते हैं। जावेद की एक गलती ने न केवल उसको नुकसान पहुंचाया, बल्कि सिरमौर जिले के सांप्रदायिक सद्भाव को ही खतरे में डाल दिया। अब सिरमौर जिले में रहने वाले हजारों मुसलमान डरे हुए हैं।

कई दशकों से रहकर अपनी रोजी-रोटी कमाने वाले लोग अब वहां से पलायन कर रहे हैं। कुछ हिंदू मकान और दुकान मालिकों ने भी मुसलमानों को मकान और दुकान खाली करने को कहा है। जावेद की एक शातिराना हरकत ने पूरे समाज की शांति को भंग कर दिया। सोशल मीडिया पर पहले से ही दोनों तरफ से विष वमन किया जा रहा है। माहौल को विषाक्त बनाने में जावेद द्वारा डाली गई पोस्ट की ही तरह की दूसरी पोस्टें अहम भूमिका निभा रही है।

हालांकि, पुलिस ने वीभत्स पोस्ट डालने और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। जिन दुकानों में तोड़फोड़ हुई है, सामान तोडेÞ गए हैं, उसकी भरपाई कौन करेगा? समाज में जो वैमनस्यता फैली, अराजकता फैली, उसके लिए कौन जिम्मेदार है, जावे या ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाती उग्रभीड़। मेरा खयाल है कि दोनों जिम्मेदार हैं। दोनों ने समझदारी का परिचय नहीं दिया। जावेद का सोशल मीडिया पर तस्वीर डालकर बहुसंख्यक समुदाय को चिढ़ाना और बिना कोई जांच पड़ताल किए उग्र हो उठने वाली भीड़ दोनों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। प्रशासन को निष्पक्षता से कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

-संजय मग्गू

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